कोतमा - आमीन वारसी- बिना मेहनत मिली हुई चीजों की कदर ना करनें का नतीजा यही होता है जो आज कोतमा विधायक सुनील सराफ के साथ हो रहा है ! जब ईश्वर ने सुनील सराफ को अपना आशीर्वाद प्रदान किया विधायक जैसे बड़े पद पर बैठा दिया तो विधायक सुनील सराफ ये समझ बैठे की बस अंतिम सत्य यही है ! अब मुझे इस कुर्सी से कोई नही हटा सकता मै सदियों के लिए अमर हो गया हूँ ! तो माननीय विधायक जी को ये बताना चाहते है संसार का यह नियम है कि सदा बादशाहियत नही रहती कोई भी व्यक्ति हमेशा बादशाह नही बना रह सकता ठीक उसी तरह अब आप विधायक नही रहेगें ! आप भले ही लाख जतन कर लीजिए कांग्रेस पार्टी आपको टिकट दे भी दे तो भी आप विधायक नही बन सकतें ! हो सकता है माननीय विधायक जी एवं उनके समर्थकों को मेरी लेखनी अच्छी ना लगें हो सकता है मुझे मन ही मन आप और आपके समर्थक गाली भी दे ! उससें मुझे कोई फर्क नही पड़ता सच लिखना और कहना हमारा धर्म है वो हम कर रहें है हमने पहलें भी कहा था कि वर्ष 2018 विधानसभा चुनाव में आपको कोई हरा नही सकता और आज फिर कह रहें कि वर्ष 2023 विधानसभा चुनाव में आपको कोई जिता नही सकता ! ऐसा हम इसलिए कह रहें कि जो बोएगा वही पाएगा तेरा किया आगें आएगा सुख दुख है क्या फल करमो का जैसी करनी वैसी भरनी ! यह गीत कोतमा विधायक सुनील सराफ जी पर बिल्कुल फिट बैठ चुका है ! मतलब ये कि सुनील सराफ का किया हुआ अब उनकें आगें आ चुका है जो सुनील सराफ की आगामी राजनैतिक सफर के लिए अच्छा नही है ! सुनील सराफ जी वर्ष 2018 में विधायक बननें के बाद से अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ जनों कार्यकर्ताओं को निचा दिखानें वरिष्ठों का मुह चिढ़ाने जैसा कारनामा किया गया कभी पार्टी कार्यकर्ताओं को मान सम्मान नही दिया गया! बल्कि विधायक जी कांग्रेस पार्टी के पदाधिकारी कार्यकर्ताओं को हमेशा ये कहते नज़र आए कि ये लोग कांग्रेस पार्टी के है ही नही ! और यही कहते कहते 5 साल का अपना कार्यकाल समाप्त कर लिये ! सुनील सराफ जी विधायक बनने के बाद सिर्फ कांग्रेस पार्टी पदाधिकारियों कार्यकर्ताओं से अपनी पुरानी रंजिश के एवज़ में कभी किसी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया तो किसी कार्यकर्ता पर थाने में शिकायत करके पुलिस से प्रताड़ित कराया ! अब आज वही कांग्रेसी जिन्हें सुनील सराफ कांग्रेसी मान ने को तैयार नही थें वही लोग टिकट वितरण में जमकर विरोध कर रहें ! अगर ये मान भी लिया जाए कि कांग्रेस पार्टी एक बार फिर से सुनील सराफ को मौका दे देती है तो सुनील सराफ चुनाव जीत जाए ये संभव ही नही है ! क्योंकि 15 महीने की कमलनाथ सरकार में विधायक सुनील सराफ जी (वन मेन आर्मी) की तरह अपनी मनमानी करतें रहें और जन्म जाति कांग्रेसी पदाधिकारी कार्यकर्ता परेशान होते रहें ! नतीजा ये हुआ कि एक एक करके वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भाजपा का दामन थामते चलें गए और जो बचें वो विधायक जी से नाता तोड़कर हाईकमान संगठन की गाइडलाइन पर का काम करतें रहें ! जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए और जो बचें हुए कांग्रेसी नेता दोनों मिलकर अब 2023 विधानसभा चुनाव में विरोध कर रहें है !
कल और आज में बहोत फर्क है -
एक बात पर गौर करना चाहिए कि सुनील सराफ के बीते हुए कल और आज में बहोत अंतर आ गया है वर्ष 2018 विधानसभा चुनाव में जब सुनील सराफ को कांग्रेस और संगठन ने अपना प्रत्याशी घोषित किया था ! तो अन्य दावेदारों ने इसका विरोध जरूर किया था जो एक आम बात है चुनाव के दौरान ये सब होता रहता है ! भले ही कुछ लोगों ने सुनील सराफ का साथ ना दिया होगा लेकिन सड़क पर उतर कर किसी कांग्रेसी नेता ने खुलकर सुनील सराफ का विरोध भी नही किया था !
बल्कि वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक त्रिपाठी कोतमा एवं राकेश गर्गू शुक्ला बिजुरी जैसे बड़े नेताओं ने सुनील सराफ का खुलकर सहयोग किया था ! लेकिन आज सुनील सराफ ने अपनी हिटलर शाही अहंकार की बदौलत कांग्रेस पार्टी का बेहतर नेतत्व करनें वालें इन नेताओं को भी खो दिया है ! सुनील सराफ पिछलें चुनाव में विधानसभा क्षेत्र की आमजनता के लिए एक साफ़ स्वच्छ छवि का बेदाग चेहरा था ! जिस से जनता ने अपना भरपूर आशीर्वाद दिया और सुनील सराफ विधायक बन गए !
ये बात तो हो गई बीते हुए कल की लेकिन आज की बात करें तो सुनील सराफ एक बदनाम चेहरा बन चुकें है! चाहे महिला से छेड़छाड़ का मामला हो फिर तमंचे पे डिस्को खाना खाकर ढाबा वाले का पैसा ना देना स्वेच्छा अनुदान राशि गड़बड़ झाला मामला हो ! सुनील सराफ ने गलत क्या किया और क्या नही किया ये अलग बात है ! लेकिन क्षेत्र में हो रही जनचर्चा के मुताबिक आज कोतमा विधानसभा क्षेत्र में सुनील सराफ का विरोध सर चढ़कर बोल रहा ! सुनील सराफ का विरोध कांग्रेस पार्टी की एक बड़ी फौज सुनील सराफ के विरोध में है अशोक त्रिपाठी राकेश गर्गू शुक्ला हो या फिर युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष गुडडू चौहान एन एस यू आई अध्य्क्ष रफी अहमद जिला पंचायत सदस्य रामजी रिंकू मिश्रा सहित अन्य कांग्रेसी नेता कांग्रेस हाईकमान तक अपना विरोध दर्ज करा चुके है बावजूद इसके कांग्रेस पार्टी एवं संगठन सुनील सराफ को पुनः कोतमा विधानसभा का प्रत्याशी बनाती है तो निश्चित ही कांग्रेस पार्टी को कोतमा विधानसभा सीट गवानी पड़ेगी !
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