Monday, May 25, 2026

तो क्या दलित होना गुनाह है मैं देश द्रोही नही मैं आतंकवादी नही


कोतमा - आमीन वारसी - शोसल मीडिया में दिल को झकझोर देने वाला एक वीडियो वायरल हो रहा जिसमें एक गरीब दलित आदिवासी छात्र अपने हक की लड़ाई कुछ इस तरह लड़ रहा गले में हाढी़ और पीछे झाड़ू बांधकर विरोध कर रहा विश्व विद्यालय प्रबंधन पर आरोप लगा रहा और कह रहा कि क्या दलित होना गुनाह है मैं कोई देश द्रोही नही हूं मैं आतंकवादी नही हूं ! तो वही दूसरी ओर सत्ता का सुख भोग रहें दलित आदिवासी नेता जिला अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम आयोग अध्यक्ष रामलाल रौतेल सांसद हिमाद्रि सिंह अनूपपुर विधायक बिसाहू लाल रामदास पुरी सहित तमाम सत्ताधारी दलित नेता मूकदर्शक बने है ! इन आदिवासी नेताओं से सवाल है कि आप आदिवासी नेता सिर्फ सत्ता का सुख भोगने जैसे महंगी गाड़ियों में घुमना पेंशन वेतन एवं कमीशन के लिए ही राजनीति कर रहें है ! अनूपपुर जिले में निवासरत अन्य जाति समाज के गरीब लोगों पर ज़ुल्म तो हो ही रहा है लेकिन क्या तुम्हें अपने ही जाती समाज के लोगों पर हो रहें ज़ुल्म भी नही दिखाई पड़ रहें ! जिनका वोट और समर्थन पाकर आज इस मुकाम पर हो आज अगर हीरा सिंह श्याम भाजपा जिला अध्यक्ष है तो उसका मुख्य कारण सिर्फ यह है कि भारतीय जनता पार्टी ने देखा कि शहडोल संभाग आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है चुनाव में इसका असर अच्छा रहेगा अच्छा संदेश जाएगा आदिवासी जिला अध्यक्ष बनाने पार्टी को अच्छा खासा फायदा होगा और हीरा सिंह श्याम आदिवासी वोट ज्यादा से ज्यादा दिलाएंगे इसलिए हीरा सिंह श्याम अनूपपुर जिला अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान है ! वही सांसद हिमाद्रि सिंह का भी यही हाल है सिर्फ अपने वेतन पेंशन कमीशन से मतलब है वे जानती है शहडोल संभाग आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है और भारतीय जनता पार्टी पुनः टिकट देकर चुनाव जिता ही देंगी इसलिए इन्हें भी शहडोल संभाग की आम जनता सहित दलित आदिवासी आमजन से कोई लेना-देना नही सिर्फ चुनाव के वक्त ही आमजनता की याद आती है ! रामलाल रौतेल और बिसाहू लाल रामदास पुरी भी दलित आदिवासी होने का पूरा फायदा उठाते हुए आदिवासी समाज को धोखे में रखा चुनाव में आदिवासी समाज के लोगों को तरह तरह का प्रलोभन देकर वोट की राजनीति करते रहें !

दलित युवक भूख-हड़ताल पर- 

अमरकंटक विश्व विद्यालय में दो दिन से एक दलित छात्र युवक विश्व विद्यालय प्रबंधन से न्याय की मांग कर रहा था लेकिन प्रबंधन ने उक्त दलित युवक की नही सुनी जिससे मजबूर होकर छात्र युवक भूख-हड़ताल पर बैठा गया ! अब तक विश्व विद्यालय प्रबंधन और ना ही इनमें से किसी भी सत्ताधारी दलित आदिवासी नेता ने संज्ञान नही लिया !

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