Saturday, December 1, 2018

किसके सर होगा चौदहवीं विधान सभा का ताज





कोतमा/आमीन वारसी- विधानसभा चुनाव गठन के बाद से 60 वर्ष में यह रहा समीकरण 1957 में विधानसभा चुनाव गठन हुआ मध्यप्रदेश की 230 वीं विधानसभा सीट अनूपपुर जिले के अंतिम छोर पर बसे कोतमा के प्रथम कांग्रेस विधायक हरिराज कुंवर रहे 1962 में  कांग्रेस की गिरजा कुमारी 1967 में भी कांग्रेस से ही के,एम सिंह विधायक रहे 1972 में फिर कांग्रेस के ही मृगेंद्र सिंह विधायक रहे उसके बाद 1977 में जनता पार्टी से बाबू लाल सिंह विधायक रहे और 3 वर्ष में ही चुनाव हुए तो 1980 में कांग्रेस से भगवानदीन फिर 1985 में भी कांग्रेस के भगवानदीन विधायक रहे है फिर 1990 में भारतीय जनता पार्टी आगाज़ हुआ जिसमें छोटेलाल मात्र तीन वर्ष ही विधायक रहे और 1993 में पुन कांग्रेस की वापसी हुई और  राजेश नंदनी विधायक बनी फिर 1998 से 2003 तक भाजपा के जयसिंह मरावी दो बार विधायक रहे 2008 में दिलीप जायसवाल विधायक रहे 2013 वर्तमान में कांग्रेस पार्टी के विधायक मनोज अग्रवाल है जिनका कार्यकाल 7 जनवरी को समाप्त हो जाएगा। अब तक कुल तेरह विधानसभा चुनाव हुए जिसमें 8 पर कांग्रेस 4 पर भाजपा और 1 जनता पार्टी के विधायक कोतमा विधान सभा क्षेत्र का नेतृत्व कर चुके है मतलब हमेशा से ही कोतमा विधान सभा काँग्रेस का गढ़ रहा है अब 14 चौदहवीं विधानसभा चुनाव हो चुका है जिसकी मतगणना 11दिसम्बर को होना है अब देखना यह है कि कोतमा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की वापसी हो पाएगी या फिर कांग्रेस अपनी परम्परागत कोतमा विधान सभा सीट पर कायम रहेगी। वैसे पुरे मध्य प्रदेश में बढ़े मतदान प्रतिशत से सत्ताधारी दल के होश उड़े हुए है कुछ कहा नहीं जा सकता है कि मध्यप्रदेश में चौथी पारी खेल रही भाजपा जीत पाएगी या फिर 15 वर्ष से बनवास काट रही कांग्रेस की वापसी हो सकती है । वैसे मध्य प्रदेश बीजेपी का अध्ययन दल प्रदेश में हुए चुनाव में ढाई प्रतिशत मतदान बढ़ने को लेकर इस बात का अध्ययन करने में जुटा हुआ है की आखिर बढ़ा वोट प्रतिशत किस तरफ गया है .यह ढाई प्रतिशत बढ़ा वोट सत्ता में बीजेपी को वापस ला रहा है या कांग्रेस का वनवास ख़त्म कर रहा है .बताया गया है की बीजेपी का एक बड़ा वर्ग इसे शिवराज सरकार की नीतियों पर जनता का बढ़ा हुआ विश्वास मान कर चल रहा तो एक धड़ा सरकार के खिलाफ इन्कमवेंसी मानकर चल रहा है .सरकार में बैठे तमाम अफसरों ने धारण कर लिया है इन सबके बीच मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मानकर चल रहे हैं की बीजेपी को जनता का आशीर्वाद मिला है और वह सरकार बनाएंगे वही कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ एवं सिंधिया भी मध्यप्रदेश में कांग्रेस पार्टी की वापसी करने की बात कह रहे है।

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