कोतमा - आमीन वारसी- अपराध चाहें जो भी करों जैसा भी करों अपराध करतें समय चिंता करने की बिल्कुल भी जरूरत नही क्योंकि आपके द्वारा भाजपा की सदस्यता लेते ही या सत्ता धारियों का संरक्षण मिलते ही आपके सारे दाग सारे अपराध अपनें आप धुल जाएंगे ! इन दिनों हमारे भारत देश में यही चल रहा तमाम तरह के अपराध ज्यादातर भाजपा नेता ही करतें पाएं जा रहें है या फिर अन्य अपराधियों को सरंक्षण भाजपा नेता ही दे रहें है ! जिसका जीता जागता उदाहरण 17 अक्टूबर को कोतमा में देखने मिला हाल ही में बीते दिनों कोतमा थानें में प्रशांत जैन जनता पुस्तक भंडार संचालक के विरुद्ध पास्को एक्ट सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया है ! कोतमा पुलिस अनुसार आरोपी जनता पुस्तक भंडार संचालक प्रशांत जैन फरार बताया जा रहा था !
ये भी हो सकता है धन बल के जरिए पीड़ित लड़की एवं उसके परिवार पर दबाव बनाकर प्रलोभन देकर मामलें को अपनें पक्ष में कराकें प्रशांत जैन ने जमानत भी करा लिया होंगा लेकिन ये याद रहें कि उक्त मामलें में माननीय न्यायालय ने अभी तक प्रशांत जैन को दोषमुक्त नही किया है ! वही दूसरा मामला माननीय न्यायालय कटनी द्वारा जारी वारंट अनुसार सन्मति जैन एवं सुनील अग्रवाल फरार आरोपी है ! जिनकी जमानत याचिका माननीय उच्च न्यायालय दिल्ली ने भी खारिज कर दी है ! इन्हें भी अब तक माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दोषमुक्त नही किया गया है ! आज भी समय समय पर कटनी पुलिस तो कही कलकत्ता पुलिस 420/467/468/ सहित अन्य धाराओं के मामलों में आरोपियों के ठिकानों पर छापामार कार्यवाही करती ही रहती है ! फिर भी मस्त मलंग फरार आरोपी बड़े मजे से घूम फिर रहें है भाजपा नेता एवं संवैधानिक पद पर बैठे जनप्रतिनिधि विधायक सांसद मंत्री मिनिस्टर से मेल जोल बढ़ा रहें अपनें मकान दुकान प्रतिष्ठान का उद्धघाटन करा रहें और साथ में बैठकर चाय नाश्ता भी कर रहें है ! यह दृश्य देखकर नगर में जनचर्चा आम है कि क्या अब माननीय न्यायालय के आदेशों का कोई महत्व नही रह गया क्या अब न्याय व्यवस्था समाप्त हो चुकी है क्या देश में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है ! क्या अब कानून व्यवस्था सिर्फ गरीब अनपढ़ आम व्यक्तियों पर ही लागू है ! क्या बड़े पैसे वाला बड़े नाम वाला व्यक्ति अगर बड़े से बड़ा अपराध करके सत्ता का संरक्षण प्राप्त करलें तो यूं ही मज़े से घूमता फिरता रहेगा ! अगर सचमुच ऐसा है तो आम जन मानस सीधे साधे व्यक्तियों के लिए अच्छा संकेत बिल्कुल भी नही है ! अब कोई भी सत्ता धारी पैसे वाला व्यक्ति जब चाहे बंद कमरे में या फिर सरेराह सड़कों पर किसी भी आम व्यक्ति की इज्जत को आसानी से तार-तार कर सकता है जैसे चोरी डकैती गुड्डा गर्दी अवैध कारोबार तमाम तरह का अपराध कर सकता है ! क्योंकि पैसे वालें व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध और अपराधी को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है ! इसलिए अपराध करनें वालें व्यक्ति पर अपराध ही दर्ज नही होगा और अगर अपराध दर्ज हो भी गया तो अपराधी ऐसे ही कानून से कबंडी खेलता रहेगा ! और आम नागरिक पीड़ित परिवार फरियादी माननीय न्यायालय और थानें का चक्कर लगाता ही रहेगा !
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