Thursday, February 29, 2024

फर्जी परमिशन के आसरे भू माफिया हलीम ने बेच दी शासकीय भूमि


कोतमा- आमीन वारसी- फरियादी रियाजुददीन ने थानें में लिखित शिकायत करतें हुए बताया कि मों हलीम पिता मों जलील निवासी वार्ड नं 7 बनिया टोला कोतमा द्वारा वर्ष 2019 में भालूमाडा़ रोड विकास नगर स्थित भूमि खसरा नं 239 रकवा 20× 40 कुल 800 वर्गफिट का विक्रय पंजीयन कराया गया था ! जिसमें 20 ×10 कुल 200 वर्ग फिट खसरा नं 237 स्वास्थ्य विभाग की शासकीय भूमि है जिसे मों हलीम अपनी भूमि बता कर मुझे बेच दिया ! जब मै उक्त विक्रित भूमि पर निर्माण कार्य करना शुरू किया तो विवाद उतपन्न हुआ और राजस्व विभाग की टीम द्वारा सीमांकन किया गया तो मुझे यह जानकारी लगी कि पूर्व दिशा की ओर स्वास्थ्य विभाग की शासकीय भूमि है ! जिसे कोतमा नगर पालिका द्वारा शासकीय भूमि में मेरे द्वारा किये गए अतिक्रमण को मुक्त करा दिया गया ! इस तरह मेरी 200 वर्ग फिट भूमि कम हो गई और मों हलीम द्वारा मुझसे पूरे 800 वर्ग फिट भूमि का पैसा ले लिया गया है ! जब मैंने मों हलीम से पैसा वापस या फिर उसके बदले जमीन की मांग की गई तो मों हलीम द्वारा साफ़ साफ़ मना कर दिया गया मों हलीम कह रहा कि मै जमीन बेच दिया हूँ अब सारे विवाद तुम समझों कुल मिलाकर रियाजुददीन का धन धर्म दोनों मों हलीम ने ले लिया ! अब सवाल यह है कि क्या फरियादी रियाजुददीन को न्याय मिल पाएगा और क्या मों हलीम के विरुद्ध शासकीय भूमि विक्रय करने एवं फरियादी के साथ धोखाधड़ी करने की कार्य वाही होगी! या फिर मों हलीम इसी तरह फर्जी तरीके से शासकीय भूमि विक्रय करता रहेगा ! 

देव शरण सिंह ने खोली थी पोल- 

वार्ड नं 10 पूर्व पार्षद आदिवासी नेता देव शरण सिंह ने बताया कि मों हलीम द्वारा निजी भूमि के आड़ में शासकीय भूमि को भी अपना निशाना बना गया है ! वार्ड नं 10 भालूमाडा़ रोड पुराने हास्पिटल की शासकीय भूमि पर निजी भूमि की आड़ में अवैध कब्जा किया जा रहा था ! मेरे और वार्ड वासियों के विरोध के बाद राजस्व विभाग एवं नगर पालिका ने संज्ञान लिया तब कही जाकर शासकीय भूमि पर हो रहें अवैध कब्जें को रोका गया था ! 

सब फर्जी प्रतिवेदन और परमिशन का खेल - 

देव शरण सिंह ने बताया कि कोतमा तहसील अंतर्गत पटवारी हल्का कल्याणपुर स्थित भूमि खसरा नं 239 का जुज़ भाग मों हलीम पिता मों जलील का नाम पर दर्ज है ! जबकि उक्त खसरा नं 239 की भूमि पर वर्षों पहले भालूमाडा़ रोड बना दी गई है! राजस्व रिकॉर्ड से खसरा नं 239 के पूर्व भूस्वामी छोटे लाल का नाम नही हटाया गया और वर्ष 1993 में मों हलीम पूर्व भूस्वामी छोटे लाल यादव से उक्त भूमि खरीदा गया ! जबकि छोटे लाल के पूर्वजों द्वारा भालूमाडा़ रोड एवं हास्पिटल निर्माण कार्य के वक्त ही उक्त भूमि दान कर दिए थें ! राजस्व रिकॉर्ड में सुधार ना किये जानें और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही का फायदा उठाते हुए मों हलीम द्वारा प्लाटिंग भूखंड कर के 5 लोगों को उक्त भूमि बेचा गया! जिसमें रियाजुददीन पिता निजामुद्दीन कसमुददीन पिता सहाबुद्दीन मों सईद पिता अयूब कुरैशी तारिक़ शमी पिता मों शमी सिददीकी सहित अन्य लोगों ने खरीदा है ! 

 कमीशन लेकर दिया गया परमिशन प्रतिवेदन - 

देव शरण सिंह ने बताया कि वर्ष 20-17-18 में उक्त भूमि खसरा नं 239 जुज़ भाग विक्रय के संबंध में विक्रय पंजीयन हेतु आवेदक मों हलीम द्वारा कलेक्टर से परमिशन का आवेदन किया गया था ! तत्कालीन अनूपपुर अपर कलेक्टर कोतमा एसडीएम एवं कोतमा कल्याणपुर राजस्व निरीक्षक ने मिलकर ऐसा परमिशन प्रतिवेदन दिया है ! जिसे देखकर कोई भी यही कहेगा कि इन लोगों ने अवश्य शराब पीकर इस तरह का प्रतिवेदन परमिशन तैयार किया है ! या फिर निश्चित ही इन अधिकारियों ने आवेदक से मोटी रकम लेकर विक्रय पंजीयन हेतु परमिशन दिया है ! बता दे कि तत्कालीन अपर कलेक्टर द्वारा तत्कालीन कोतमा एसडीएम से मागें गए जाचं प्रतिवेदन में साफ़ साफ़ यह उल्लेख किया गया है कि कही आवेदक मों हलीम द्वारा भूखंडों में भूमि विक्रय तो नही किया जा रहा ! फिर भी जिम्मेदार तत्कालीन एसडीएम और आर आई ने अपनें जाचं प्रतिवेदन में भूमि भूखंड करके विक्रय करनें का जिक्र ही नही किया गया ! जबकि आवेदक मों हलीम द्वारा भूखंड करके ही 5 व्यक्तियों को भूमि विक्रय किया गया है ! जो कोलोनाइजर रेरा की धज्जियां उड़ा रहा ! ऐसे में यही कहा जा सकता है कि अपर कलेक्टर द्वारा जारी परमिशन फर्जी था और जिम्मेदारों ने जाचं प्रतिवेदन देते समय आर आई द्वारा उक्त भूमि का ना ही मौका जाचं किया और ना ही चौहद्दी काश्तकारों को मौके पर बुलाकर उक्त भूमि का सीमाकंन किया गया सिर्फ आफिस में बैठे बैठे ही परमिशन हेतु जाचं प्रतिवेदन बनाकर दे दिया गया ! उसी फर्जी परमिशन के आसरे मों हलीम द्वारा खसरा नं 239 जुज़ भाग का विक्रय पंजीयन करा दिया गया है ! अब वर्ष 20-17-18 में कौन अपर कलेक्टर था जिसनें फर्जी परमिशन दिया और उस समय  कोतमा एसडीएम एवं आर आई कौन था जिसनें फर्जी जाचं प्रतिवेदन तैयार किया ! अगर इसी तरह राजस्व विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कर्मचारी काम करेंगे तो वो दिन दूर नही कोतमा तहसील अंतर्गत समस्त शासकीय संपत्ति पर भू माफियाओं का कब्जा होगा !

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