कोतमा- आमीन वारसी- इन दिनों शहर में खूब हो हल्ला हो रहा लगता है चुनाव आ गया है आए दिन किसी ना किसी पार्टी के प्रदेश नेत्तृत्व का आगमन जिलें में हो रहा बैठक पर बैठक हो रही आरोप प्रत्यारोप का दौर शुरू है वर्षों से सत्ता से बाहर विपक्ष किसी तरह सत्ता में आनें का रास्ता बना रही है तो दूसरी ओर सत्ताधारी पार्टी को सत्ता से बाहर होने का डर सता रहा है! और फिर हालात देखते हुए कुछ कहा नही जा सकता 2018 की तरह एक बार फिर से कांग्रेस पार्टी मध्यप्रदेश सत्ता में काबिज हो सकती है !
भाजपा प्रदेश नेत्तृत्व एक बार फिर से अबकी बार 200 पार हल्ला मचा रहा लेकिन ऐसा लगता है 2018 की तर्ज़ पर अबकी बार फिर 100 पार करना मुश्किल दिखाई पड़ रहा!
तो क्या हारे हुए नेताओं के आसरे होगी नैया पार-
ऐसा हम इसलिए कह रहें कि भाजपा द्वारा किये गए सारे प्रायोजित कार्यक्रम को हमनें देखा है!अगर अनूपपुर जिले की बात करें तो वर्ष 2022-23 में हुए नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनावों में सत्ता धारी पार्टी की जमकर फजीहत हुई है! आलम यह रहा कि कई वरिष्ठ भाजपा नेता अपना बूथ अपना वार्ड नही बचा पाए खुद तो चुनाव हारे ही साथ ही पार्टी की भी फजीहत कराए !
और आज वही भाजपा नेता जो अपना वार्ड अपना बूथ हारनें के बाद पूरे विधानसभा चुनाव में भाजपा को प्रचंड बहुमत से जीत दिलानें का दम भर रहें है ! ये कैसे संभव है जो दो चार महीने पहले खुद ही चुनाव हार गया हो वो पूरे नगर एवं पूरे विधानसभा के बूथों पर जीत कैसे दिला सकता है इस विषय पर भारतीय जनता पार्टी व संगठन को गहरा मंथन चिंतन करना चाहिए भाजपा प्रदेश नेत्तृत्व किसी भी तरह से गुमराह ना हो ! बल्कि इस पर विचार करें कि आखिर दो चार महीने ऐसा क्या हो गया कि हारे हुए नेताओं के कहने पर जनता वोट करेगी अगर जनता इन हारे हुए नेताओं को जीताना चाहती तो स्थानीय चुनाव में ही जीता देती लेकिन ऐसा नही हुआ जनता ने सीधे कुर्सी से उतार दिया अगर भारतीय जनता पार्टी व संगठन को आगामी विधानसभा चुनाव जीतना है तो ऐसे हारे हुए नेताओं पर निर्भर ना रहें बल्कि आत्म निर्भर बनें !
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