Saturday, March 11, 2023

तो क्या संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदारों की स्वार्थपरता की भेंट चढ़ गई किसानों की ज़मीन


नेशनल हाइवे 78 के मुआवजा वितरण मामले में श्रीवास्तव बाबू पर 420 का अपराध हुआ था पंजीबद्ध, तत्कालीन एस डी एम मिलिंद नागदेवे को रखा गया था जांच से सुरक्षित 

कोतमा- आमीन वारसी- अगर मेरी इस खबर को अनूपपुर जिले के नवागत कलेक्टर आशीष विशिष्ट जी पढ़ रहें है तो आपसे निवेदन है कि अगर आप सचमुच अनूपपुर जिले वासियों का भला करनें आए है अगर आपकों पीड़ित किसानों की जरा भी चिंता है तो आप स्वयं उक्त मुआवजा वितरण मामला देखिए और पीड़ित किसानों से स्वयं मिलकर उनकी पीडा़ समझिए क्योंकि पीड़ित किसानों को कोतमा राजस्व अधिकारियों पर अब भरोसा नही है ! अगर आप को मुझ जैसे जिम्मेदार मीडिया कर्मी की जरूरत पड़े तो याद करिएगा पूरे प्रमाणित दस्तावेज सहित उपस्थित हो जाऊगा और प्रमाण सहित बताऊंगा कि कौन कौन चोर है और कौन साहूकार ! आईए आपको बताता हूँ कोतमा राजस्व अधिकारियों का हाल  वर्ष 2016 की बात है जब नेशनल हाइवे 43 निर्माण किया जा रहा था नेशनल हाईवे तो बनकर तैयार हो गया लेकिन पीड़ित किसानों आज दिनांक तक मुआवजा राशि नही दी गई बल्कि मुआवजा वितरण के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया गया ! 

जिसमें तत्कालीन एस डी एम मिलिन्द नागदेवे और एम पी आर डी सी के संबधित ज़िम्मेदारों की मिलीभगत और स्वार्थपरता का दंश किसान आज भी झेल रहे हैं ! इस दौरान कई अधिकारियों का आना जाना लगा रहा लेकिन विगत लगभग चार वर्षों से लंबित किसानों के इस ज़ख्म पर मरहम लगाने हेतु किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने कदम नहीं बढ़ाया! विदित हो कि एन एच 43 के निर्माण होने के लगभग चार वर्षों के बाद भी संबंधित किसानों को  कोतमा से छत्तीसगढ़ सीमा तक एन एच सड़क में अधिग्रहित हुई भूमि का मुआवजा आज दिनांक तक नही मिल सका और चार वर्षों से किसान केवल कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं ! 

 तो क्या किसानों को गुमराह करनें की गई थी दिखावे की कार्यवाही -

किसानों द्वारा लगातार शिकायत किए जानें पर कमिश्नर शहडोल ने कलेक्टर अनूपपुर को शीघ्र जांच कर मामलें का निराकरण करनें निर्देशित दिया था जिस पर कलेक्टर सुश्री सोनिया मीणा के निर्देश पर शिकायतकर्ता अनुविभागीय अधिकारी ऋषि सिंघई द्वारा कम्प्यूटर टाइप पत्र क्रमांक 1713/री-1/2021 कोतमा थाने में दिनांक 11/8/2021 को लिखित शिकायत की गई थी एवं इस आशय की सूचना दी गई थी कि कोतमा एसडीएम कार्ययालय में पदस्थ तत्कालीन प्रवाचक विवेकानंद श्रीवास्तव द्वारा एन एच 43 निर्माण में प्रभावित भू अर्जन में छूटे ग्राम कल्याणपुर बुढानपुर बेलिया छोट कोतमा डोला रेऊदा तहसील कोतमा जिला अनुपपुर के आपसी सहमति क्रय नीति अंतर्गत भूअर्जन एवं शासकीय सम्पत्तियों की परिसम्पत्तियों   मुआवजा भुगतान सम्बंध में अनियमितता की गई! जिस पर उच्चाधिकारियों के निर्देशन पर मामला पंजीबद्ध कराने के निर्देश हुए हैं ! 
प्रथम दृष्टया 420 ता.हि. का अपराध पाए जानें पर थाना प्रभारी राकेश बैस द्वारा अपराध क्रमांक 336/21 धारा 420 के तहत मामला पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया था! किसानों की मानें तो प्रश्न उनकें ज़मीन की कीमत की है जो भू अर्जन अधिकारी के खाते में मध्यप्रदेश शासन द्वारा प्रदाय की जा चुकी है और उस राशि में से केवल दो किसानों के साथ यारी निभाई गई और उन्हें भुगतान किया गया और बाकी किसानों को दरकिनार कर कार्यालयों के चक्कर काटने के लिए मजबूर किया जा रहा वो किसान आज भी ठोकरें खा रहे हैं ! 

 ये है पूरा मामला-

वर्ष 2016 में नेशनल हाइवे क्रमांक 78 में कोतमा अनुभाग अंतर्गत ग्राम कल्याणपुर, बुढानपुर, बेलिया छोट, कोतमा, डोला, रेऊदा में बनें हाइवे में किसानों की खेतिहर जमीनों का अधिग्रहण कर उन्हें मुआवजा वितरण करना था जिसमें नजरी नक्शा सीमांकन सहित हितग्राहियों के निर्धारण व मुआवजा वितरण की जिम्मेदारी कोतमा अनुभाग के राजस्व अधिकारियों को दी गई थी !
और वर्ष 2017-18 में मध्यप्रदेश शासन एम पी आर डी सी द्वारा अधिग्रहित भूमि की मुआवजा राशि कमीशन खोर कोतमा एस डी एम के खातें में दी जा चुकी थी! लेकिन कमीशन खोर तत्कालीन एस डी एम मिलिन्द नागदेवे  द्वारा किसानों को वह राशि प्रदान नहीं की गई! सिर्फ पीड़ित किसानों को कार्यालय का चक्कर लगवाया जा रहा था सूत्रों की माने तो उसी मुआवजा की सूची में से सिर्फ दो व्यक्ति अजीमुद्दीन उर्फ भोंचु एवं अस्विनी त्रिपाठी से 5 - 5 लाख रुपए कमीशन लेकर तत्कालीन एस डी एम मिलिन्द नागदेवे दोनों व्यक्तियों को लगभग 60 लाख रुपए मुआवजा राशि दे दिया गया शेष बचे लगभग 29 पीड़ित किसान आज भी मुआवजा राशि पानें के लिए संभागायुक्त कार्यालय से लेकर कलेक्टर एवं एस डी एम कार्यालय का प्रतिदिन चक्कर लगा रहें है! और कमीशन खोर मिलिन्द नागदेवे मौज कर रहा ! बता दे कि उक्त मुआवजा मामले में मात्र दो लोगो को चेक देने के बाद मामलें की फ़ाइल ही लापता हो गई जिसे खोजने हेतु समूचा विभाग बहाना कर रहा ! और उसी फ़ाइल के गुमने की लापरवाही पर श्रीवास्तव बाबू पर पूर्व में कार्यवाही भी हुई थी! जो अब ठंडे बस्ते में है मुआवजा वितरण मामले में श्रीवास्तव बाबू पर एफ आई आर दर्ज कराकर उन्हें अनियमितता का आरोपी बनाया गया है जबकि असली खिलाड़ी मिलिन्द नागदेवे के दस्तखत के मुआवजा वितरण कैसे सम्भव था ! विभाग की बदनामी ना हो इसलिए कमीशन खोर एस डीएम को बचाते हुए छोटे कर्मचारी पर छोटी सी कार्यवाही कर पूरा राजस्व विभाग पवित्र हो गया! 

 सूचना के अधिकार के तहत किसान द्वारा मांगी गई जानकारी पर एम पी आर डी सी शहडोल ने उपलब्ध कराई लापता दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां-
 
पीड़ित किसान जीवन लाल चौधरी ने एम पी आर डी सी शहडोल में सूचना के अधिकार के तहत जानकारी मांगी, तो एम पी आर डी सी शहडोल के द्वारा उन सारे दस्तावेजों की प्रमाणित प्रति प्रदान की गई, जिन दस्तावेजों के गुम हो जाने का हवाला देकर किसानों की भूमियों का मुआवजा रोक दिया गया था! अब पूर्व में आंकलित की गई राशि पर कटौती करते हुए ऊंट के मुंह में जीरा के समान राशि दिए जाने की नोटिस मिलने पर किसानों में एक ओर आक्रोश है तो दूसरी ओर किसान स्वयं को ठगा सा महसूस कर रहे हैं! 
एक ओर तो सरकार किसानों के उत्थान के लिए बड़ी बड़ी बातें करती है और दूसरी ओर किसानोंं की भूमि अधिग्रहण के बाद उनकी भूमियों का मुआवजा प्रदान न कर उनके साथ होने वाली ज्यादती पर समस्त ज़िम्मेदार चुप्पी साधे बैठे हुए हैं! सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार किसानों ने इस मुआवजे को लेने से इंकार करते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की राह अपनाएंगे! 

 इनका कहना -

मैं जीवन लाल चौधरी विगत लगभग चार वर्षों से कार्यालयों के चक्कर काट कर थक चुका हूं और पैसों के अभाव में दो बार मेरी बेटी की शादी टूट चुकी है, जिससे मैं पूरी तरह से टूट चुका हूं और अब मुआवजे की नोटिस देखकर बची हुई आस भी टूटती हुई दिखाईं दे रही है! इस राशि को हम स्वीकार नहीं करेंगे और सभी किसान हाई कोर्ट जाकर न्याय की गुहार लगाएंगे! 

जीवन लाल चौधरी पीड़ित किसान

 इनका कहना -

विगत चार पांच साल में हम लोगों ने केवल कार्यालयों के चक्कर काटे हैं और हमें आज तक केवल निराशा ही मिली है! पूर्व में निर्धारित की गई राशि की तुलना में एक अत्यंत ही छोटी राशि प्रदान करने हेतु नोटिस दी गई है, जो कि हमें स्वीकार नहीं है! 

अब्दुल सकूर पीड़ित किसान

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