कोतमा/आमीन वारसी- प्रदेश में चुनावी शंखनाद होते ही प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई है साथ ही मध्यप्रदेश के अंतिम छोर पर बसे अनूपपुर जिले की एवं शहडोल संभाग की एकलौती समान्य सीट कोतमा विधान में जमकर घमासान मचा हुआ है दोनों ही प्रमुख पार्टी के नेताओं मे टिकट वितरण को लेकर भी काफी उठा पटक चल रही है सभी अपने अपने हिसाब से अपनी अपनी टिकट फाइनल मान रहे है शोसल मीडिया के माध्यम से तरह तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं कांग्रेस पार्टी से सर्व प्रथम उम्मीदवार मनोज अग्रवाल नागेन्द्र नाथ सिंह रामनरेश गर्ग एवं सुनील सराफ ने पार्टी व संगठन के समंक्ष अपनी दावेदारी पेश की है वही सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी मे टिकट दावेदारों की लंबी कतार है जिसमें सर्व प्रथम पूर्व विधान सभा प्रत्याशी राजेश सोनी पूर्व विधायक दिलीप जायसवाल पूर्व जिला अध्यक्ष ब्रजेश गौतम अनिल गुप्ता मनोज द्विवेदी लव कुश शुक्ला अजय शुक्ला ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है अब देखना है पार्टी किसे अपना प्रत्याशी बनाएगी अगर पिछले चुनाव की बात करें तो 2013 विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मात्र 1546 वोट से ही चुनाव हारे थे और राजेश सोनी के चुनाव हारने का कारण कई रहे है पहला यह कि राजेश सोनी एवं उनकी पत्नी उमा सोनी कोतमा नगर पालिका में 10 वर्ष अध्यक्ष रहे हैं दूसरा 2008 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी मनोज अग्रवाल अपना सब कुछ दांव पर लगा कर चुनाव हार गए थे जिससे नगर की जनता की सिमपैथी मनोज अग्रवाल के साथ जुड़ी रही वही राजेश सोनी वर्तमान में अध्यक्ष भी रहे है तो इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए जनता ने फैसला लिया कि एक बार मनोज को भी विजयी बनाया जाए लेकिन आज स्तिथि विपरीत है आज जनता का रूझान राजेश के प्रति है क्योकि मनोज अग्रवाल विधायक रहते हुए अपने क्षेत्र के लिए कुछ खास कर नहीं पाए वो इसलिए कि प्रदेश में उनकी सरकार नहीं है और राजेश सोनी ने 10 वर्ष नगर पालिका अध्यक्ष रहते हुए नगर पालिका क्षेत्र का चहुमुखी विकास किया है जिससे क्षेत्र की जनता ने अब पूरे विधान सभा क्षेत्र की जिम्मेदारी सौपने का मन बना रही है जिससे पूरे विधान सभा क्षेत्र का चहुमुखी विकास हो सकें।तीसरा कारण भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी से मिलकर भाजपा प्रत्याशी राजेश सोनी एवं अपनी ही पार्टी का विरोध करते रहे है जो भाजपा प्रत्याशी राजेश सोनी के हार का कारण बना था लेकिन हार जीत का अंतर काफी कम था अभी हाल में ही हुए गुजरात चुनाव में भाजपा प्रत्याशी भी लगभग 1000/500 वोट के अंतर से ही चुनाव हारे और जीते हैं जो मायने नहीं रखता जिसको ध्यान में रखते हुए पार्टी व संगठन सूत्रो के अनुसार कोतमा विधान सभा क्षेत्र की जनता सर्वे के आधार पर राजेश सोनी पहले स्थान पर है और पार्टी भी ऐसे जिताऊ नेता पर ही दांव लगाएगी क्यो कि बीते 15 वर्ष की अपेक्षा इस पंचवर्षीय प्रदेश में भाजपा शिवराज सरकार का काफी विरोध दिखाई पड़ रहा है जिससे पार्टी व संगठन के हाथ पाव फूले हुए है इसलिए जो जीतने लायक होगा उसे ही टिकट दिया जाएगा और पार्टी व संगठन की इस परीक्षा में शायद राजेश पास है बाकी आगे पार्टी व संगठन की मर्जी रहीं बात काँग्रेस की तो कांग्रेस के पास हारने के लिए बचा ही क्या है वैसे भी कांग्रेस 15 वर्ष से बनवास पर है इसलिए कांग्रेस पार्टी भी अपने पुराने नेता मनोज अग्रवाल को ही प्रत्याशी बनाने के मूड में है क्योकि कांग्रेस पार्टी यह समझ चुकी है कि मनोज को सिर्फ राजेश ही हरा सकता है अन्यथा और कोई नहीं इस तरह 2013 की तर्ज पर ही अगला चुनाव होना तय माना जा रहा है कि एक बार फिर मनोज राजेश आमने-सामने हो सकतें है।
Monday, October 22, 2018
राजेश मनोज फिर हो सकतें है आमने-सामने
कोतमा/आमीन वारसी- प्रदेश में चुनावी शंखनाद होते ही प्रदेश में चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई है साथ ही मध्यप्रदेश के अंतिम छोर पर बसे अनूपपुर जिले की एवं शहडोल संभाग की एकलौती समान्य सीट कोतमा विधान में जमकर घमासान मचा हुआ है दोनों ही प्रमुख पार्टी के नेताओं मे टिकट वितरण को लेकर भी काफी उठा पटक चल रही है सभी अपने अपने हिसाब से अपनी अपनी टिकट फाइनल मान रहे है शोसल मीडिया के माध्यम से तरह तरह के कयास भी लगाए जा रहे हैं कांग्रेस पार्टी से सर्व प्रथम उम्मीदवार मनोज अग्रवाल नागेन्द्र नाथ सिंह रामनरेश गर्ग एवं सुनील सराफ ने पार्टी व संगठन के समंक्ष अपनी दावेदारी पेश की है वही सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी मे टिकट दावेदारों की लंबी कतार है जिसमें सर्व प्रथम पूर्व विधान सभा प्रत्याशी राजेश सोनी पूर्व विधायक दिलीप जायसवाल पूर्व जिला अध्यक्ष ब्रजेश गौतम अनिल गुप्ता मनोज द्विवेदी लव कुश शुक्ला अजय शुक्ला ने अपनी दावेदारी प्रस्तुत की है अब देखना है पार्टी किसे अपना प्रत्याशी बनाएगी अगर पिछले चुनाव की बात करें तो 2013 विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी मात्र 1546 वोट से ही चुनाव हारे थे और राजेश सोनी के चुनाव हारने का कारण कई रहे है पहला यह कि राजेश सोनी एवं उनकी पत्नी उमा सोनी कोतमा नगर पालिका में 10 वर्ष अध्यक्ष रहे हैं दूसरा 2008 के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशी मनोज अग्रवाल अपना सब कुछ दांव पर लगा कर चुनाव हार गए थे जिससे नगर की जनता की सिमपैथी मनोज अग्रवाल के साथ जुड़ी रही वही राजेश सोनी वर्तमान में अध्यक्ष भी रहे है तो इन्ही सब बातों को ध्यान में रखते हुए जनता ने फैसला लिया कि एक बार मनोज को भी विजयी बनाया जाए लेकिन आज स्तिथि विपरीत है आज जनता का रूझान राजेश के प्रति है क्योकि मनोज अग्रवाल विधायक रहते हुए अपने क्षेत्र के लिए कुछ खास कर नहीं पाए वो इसलिए कि प्रदेश में उनकी सरकार नहीं है और राजेश सोनी ने 10 वर्ष नगर पालिका अध्यक्ष रहते हुए नगर पालिका क्षेत्र का चहुमुखी विकास किया है जिससे क्षेत्र की जनता ने अब पूरे विधान सभा क्षेत्र की जिम्मेदारी सौपने का मन बना रही है जिससे पूरे विधान सभा क्षेत्र का चहुमुखी विकास हो सकें।तीसरा कारण भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने कांग्रेस प्रत्याशी से मिलकर भाजपा प्रत्याशी राजेश सोनी एवं अपनी ही पार्टी का विरोध करते रहे है जो भाजपा प्रत्याशी राजेश सोनी के हार का कारण बना था लेकिन हार जीत का अंतर काफी कम था अभी हाल में ही हुए गुजरात चुनाव में भाजपा प्रत्याशी भी लगभग 1000/500 वोट के अंतर से ही चुनाव हारे और जीते हैं जो मायने नहीं रखता जिसको ध्यान में रखते हुए पार्टी व संगठन सूत्रो के अनुसार कोतमा विधान सभा क्षेत्र की जनता सर्वे के आधार पर राजेश सोनी पहले स्थान पर है और पार्टी भी ऐसे जिताऊ नेता पर ही दांव लगाएगी क्यो कि बीते 15 वर्ष की अपेक्षा इस पंचवर्षीय प्रदेश में भाजपा शिवराज सरकार का काफी विरोध दिखाई पड़ रहा है जिससे पार्टी व संगठन के हाथ पाव फूले हुए है इसलिए जो जीतने लायक होगा उसे ही टिकट दिया जाएगा और पार्टी व संगठन की इस परीक्षा में शायद राजेश पास है बाकी आगे पार्टी व संगठन की मर्जी रहीं बात काँग्रेस की तो कांग्रेस के पास हारने के लिए बचा ही क्या है वैसे भी कांग्रेस 15 वर्ष से बनवास पर है इसलिए कांग्रेस पार्टी भी अपने पुराने नेता मनोज अग्रवाल को ही प्रत्याशी बनाने के मूड में है क्योकि कांग्रेस पार्टी यह समझ चुकी है कि मनोज को सिर्फ राजेश ही हरा सकता है अन्यथा और कोई नहीं इस तरह 2013 की तर्ज पर ही अगला चुनाव होना तय माना जा रहा है कि एक बार फिर मनोज राजेश आमने-सामने हो सकतें है।
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